Biography of Swami vivekanand

स्वामी विवेकानंद की जीवनी

विवेकानंद की जीवनी

स्वामी विवेकानंद, भारतीय सनातन धर्म के प्रभावशाली संन्यासी और धर्मप्रचारक थे। उनका जन्म १२ जनवरी १८६३ को कोलकाता में हुआ था। वे विश्वविद्यालय पठन करने के बाद दक्षिण भारतीय मठ में संन्यास लेने चले गए, जहां उन्होंने श्री रामकृष्ण परमहंस के गुरुकुल में अध्ययन किया।

विवेकानंद को योग, ध्यान और वेदांत की गहरी ज्ञान प्राप्त थी, और उन्होंने इसे विश्वभर में प्रचारित किया। उनकी प्रचंड वक्रता, उच्च शिक्षा का ज्ञान और तत्त्वज्ञान ने उन्हें एक प्रसिद्ध धार्मिक और राष्ट्रीय नेता बना दिया।

स्वामी विवेकानंद का प्रमुख कार्यक्षेत्र भारत और पश्चिमी दुनिया था। उन्होंने धर्म, सामाजिक न्याय और मानवता के मुद्दों पर विचार किया। उन्होंने विश्व धर्म सम्मेलनों में भाग लिया और विदेशी दौरों के दौरान धर्म और तत्त्वज्ञान की उच्च विद्यालयों में व्याख्यान दिए।

स्वामी विवेकानंद का एक महत्वपूर्ण योगदान उनके पश्चिमी देशों में योग की प्रचार प्रणाली को प्रस्तुत करना था। उन्होंने भारतीय योग और ध्यान को पश्चिमी भूमि में प्रचारित किया, जिससे वे एक आध्यात्मिक और शारीरिक ताकत के स्रोत बने। उन्होंने योगासन, प्राणायाम और ध्यान की महत्त्वपूर्णता को सिद्ध किया और यह विचार प्रमाणित किया कि योग मन, शरीर और आत्मा के सम्बंध को समानरूप से संतुष्ट करता है।

स्वामी विवेकानंद की दृष्टि में शिक्षा और ज्ञान का महत्त्व था। उन्होंने युवाओं को शिक्षा के माध्यम से सामाजिक और मानवीय उत्थान का मार्ग दिखाया। उन्होंने विद्यालयों की स्थापना की, जहां सभी विद्यार्थी समान रूप से शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।

स्वामी विवेकानंद का अस्थायी निधन ४ जुलाई १९०२ को हुआ, लेकिन उनका धार्मिक और आध्यात्मिक उत्साह और संदेश आज भी मानव जीवन को प्रभावित करता है। विवेकानंद एक अद्वैत धार्मिक विचारक, संन्यासी, राष्ट्रीय नेता, शिक्षाविद और योगगुरु के रूप में एक महान व्यक्ति थे। उनका संदेश मानवता, आत्म-विश्वास, धर्म और विद्या के प्रतीक के रूप में दुनिया में आज भी प्रस्तुत है।

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